जन्म से नहीं हैं दोना हाथ, जिद है कि पास होऊं या फेल… न हारी हूं, न हारूंगी

यह हैं दमोह जिले के बम्हौरी गांव की दुर्गा। बचपन से दोनों हाथ नहीं हैं। सब काम पैरों से ही करती हैं। पढ़ाई भी। पैरों से लिखकर ही 10वीं की परीक्षा भी दी। सीखने का जुनून ऐसा कि स्कूल जाने के लिए 4 किमी पैदल चलती हैं।

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जब रिजल्ट को लेकर सवाल किया तो दुर्गा से सधा हुआ जवाब आया- मैं काबिल बनने के लिए पढ़ रही हूं। ताकि किसी पर बोझ बनने की नौबत न आए। पास फेल से क्या फर्क पड़ता है जिंदगी में न कभी हारी हूं- न आगे हारूंगी।